कहानियों में नारीत्व का सशक्त पक्ष

फूलचंद मानवदोहराव या उबाऊपन से बाहर हिंदी में कम ही कहानियां पढऩे को मिलती हैं। विषयों की विविधता, कथानक में रोचकता जहां हो, ऐसा ‘कथापाठÓ पाठक को बांधता है। रचनाकार स्त्री हो या पुरुष, मौलिकता के साथ सृजनात्मकता सहेजती कहानियां दिल से दूर नहीं होती। हिंदी कहानीकार भारत में हों या विदेश में, प्राय: युगबोध को लेकर चल पाए तभी उसकी बात चलती या टिकती नजर आती है। हाईवे ई47 की कथाकार अर्चना पैन्यूली देहरादून, बम्बई के बाद डेनमार्क में रहती हैं; तीन उपन्यास देने के बाद हिंदी की सराहनीय पत्रिकाओं में इनकी कहानियां पढऩे को मिलती हैं। अर्चना के कथानक में यथार्थ बोध, पारदर्शिता या नारी जीवन की हकीकत दिखती है तो कथात्मकता बांध लेती है। भाषा, शिल्प, शैली में सहजता यहां कृति का खास गुण है।संग्रह की बारह कथाएं प्राय: नारी प्रधान चरित्रों को उभारती हैं। इनका विस्तार रचनाकार ने विषयानुसार देते हुए वर्ग विशेष की अस्मिता को बनाए, बचाए रखने का भी प्रयास किया है। सादगी, सरलता के साथ कथ्य में सहजता यहां प्राणवायु की तरह इन्हें जीवंत बनाए रखती है। सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक स्तर पर भी नारी आज स्वतंत्र, स्वायत्त और परिपूर्ण मानी जाने लगी है। अनेक पक्षों में नारी ने अपना मुकाम पाया और उसे सिद्ध भी किया है। कथानक भारत का हो या प्रवास में कहीं, किसी भी देश का, हाईवे ई47 की कहानियों के माध्यम से अर्चना ने एक परिपक्व कहानीकार का परिचय दिया है।अनुजा, मही, लक्ष्मी या मीरा ही नहीं गॉडमदर से लेकर काशज्, कठिन चुनाव जैसी कहानियां नायिका प्रधान हैं और नारीत्व का एक अलग अंदाज, सशक्त पक्ष भी हमारे सामने रखती हैं। नारी विमर्श को समाज के वास्तविक चरित्रों के रूप में प्रस्तुत किया है। पारंपरिक वैचारिकता की चुनौती भी कहानियों में है और रूढि़वाद पर प्रहार भी पाठक यहां महसूस करेंगे। दरअसल, अर्चना पैन्यूली की कलम से निकली ये कहानियां नई सदी को दिशा देती भी प्रतीत होती हैं।महिला का अस्तित्व उसका विश्वास ही नहीं, आत्मबल भी है। स्वावलम्बन का सबक भी यहां मुखर है। ‘खुलकर कहूंगी कि मैं गे हूंÓ, ‘अगर वह इसे माफ कर देÓ, ‘वह उसे क्यों पसंद करती है Ó जैसी कहानियां चुनौती भी दे रही हैं कि ऐसी और ऐसे कितनी या कौन, कथाकार ‘यूंÓ कहानियां लिख रही हैं। मुख्यमंत्री की पत्नी जैसी रचना के लिए साहस जुटाने वाले कथाकार कम मिलेंगे। ‘मीरा और सिलवियांÓ या ‘मही क्या कहेगीÓ, ‘हाईवे ई47Ó जैसी कहानी समाज के विविध पक्षों, नारी के अलग पहलुओं को रेखांकित कर रही हैं।

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