बहराइच में दीपावली पर्व से पहले माटी के दीप व खिलौने बनाने में जुटे कुम्हार

सुभाष चन्द्र यादव

बहराइच। जनपद में  दीपावली पर्व नजदीक आते ही मिट्टी के दीए व खिलौने बनाने का काम शुरू हो गया है। हालांकि पहले की तुलना में अब मिट्टी के बर्तन व मिट्टी के दीपक के कारोबार केवल ऑन सीजन का ही रह गया है। अब लोग होली, दीपावली पर ही महज खानापूर्ति के लिए मिट्टी से बने बर्तन खरीदते हैं। लेकिन कुम्हार आज भी उतनी ही शिद्दत से मिट्टी के दीपक को अपनी पेट की आग में पकाकर हमें हमारी संस्कृति लौटाने का काम लगातार किये जा रहा हैं।वर्तमान में कुम्हार समाज के दर्जनों कारीगर शहर के विभिन्न जगहों पर दीपक बनाने का काम कर रहे हैं। जिसमें छोटीबाज़ार, बडीहाट व बशीरगंज आदि कई इलाके शामिल हैं। दीपक बनाने वाले कारीगर गुलाम कहते हैं, वे मिट्टी के बर्तन, दीपक, घड़े बनाने का काम केवल उनकी सभ्यता व संस्कृति के बचाने के लिहाज से करते हैं। अन्यथा इससे उन्हें कोई मुनाफा नहीं होता है। महंगी मिट्टी खरीदकर काम शुरू करना जिसमे एक तिहाई मिट्टी का खराब हो जाना और फिर दीपक तैयार करने के बाद भट्टी में औसतन 100 में 5 दीपकों का खराब हो जाना निश्चित है। ऐसे में कुम्हार मुनाफा कैसे कमा सकता है। यह तो केवल श्रद्धा है भारतीय संस्कृति के प्रति हमारा। समय के साथ मटकों की जगह मयूर जग ने ले ली है, दीपक की जगह कृत्रिम रोशनी की लड़ियां आ गई है। लेकिन इस सब के बावजूद कुम्हार समाज मायूस नहीं हुआ है। कुम्हारों की सोच की बात करें तो, उनका यही कहना है कि चिकनी मिट्टी चाहे जितनी महंगी मिले, मेहनत चाहे दोगुनी लगे, लेकिन वे अपनी हस्तकला और भारतीय रित-रिवाज के अभिन्न अंग दीपक की चमक को कम नहीं होने देंगे।

Like Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *