वेज खाने वाले होते हैं नेचर सेवी, रिसर्च रिपोर्ट में दावा

5 जून को पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं से प्राप्त होने वाले उत्पाद एवं डेयरी उत्पाद प्रदूषण के लिए वैसे ही जिम्मेदार हैं जैसे कि सड़कों पर चलते वाहनों से होने वाला उर्त्सजन.

अमेरिकी पत्रिका ‘ प्रोसिडिंग्स ऑफ दि नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज ’ के एक अध्ययन के मुताबिक पौधों से प्राप्त आहार को ज्यादा से ज्यादा अपनाने और मांसाहार भोजन का परित्याग करने से भोजन से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 70 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है.

शाकाहारी भोजन करने वाली एक विपणन अधिकारी विचित्रा अमरनाथन ने कहा, ‘पर्यावरण को बचाने के लिए इस समय हम सबसे बड़ी पहल शाकाहार अपनाकर कर सकते हैं। मांसाहारी भोजन ग्रीनहाउस गैस के 50 प्रतिशत से ज्यादा उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है.’

उनका यह भी कहना है कि दूध और दूध से बनी चीजों से भी हमें परहेज करना चाहिए क्योंकि इसमें गायों को खाना खिलाने और पानी पिलाने के लिए सब्जियों को उगाने की तुलना में बहुत मात्रा में फ्रेश पानी का इस्तेमाल किया जाता है जिससे दिन प्रति दिन पर्यावरण का नाश हो रहा है. विचित्रा अमरनाथन ने सभी को विगन डाइट फॉलो करने की बात कही है.

शाकाहारी भोजन के बढ़ते प्रचलन के बीच कल विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी के कई रेस्त्रां विशेष शाकाहारी व्यंजन परोसेंगे. उदाहरण के रूप में ‘द मेट्रोपॉलिटन होटल एंड स्पा’ में स्थित ‘जिंग’ रेस्त्रां विशेष शाकाहारी सूप, पिज्जा, रोल आदि परोस रहा है. रेस्त्रां में ऐसा 6 जून तक जारी रहेगा.

पर्यावरणविद गौरव बंद्योपाध्याय ने कहा, ‘अपने बगीचे में रसोइघर के जैविक अपशिष्ट का इस्तेमाल करें. सब्जियां उगाएं क्योंकि शाकाहारी भोजन देने के अलावा वे आपको ताजा ऑक्सीजन भी देते हैं’.

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